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जीएसटी से फायदा है विदेशी कंपनियों को- भरत गांधी

भारत में इनकम टेक्स रिटर्न भरना लोगों के लिए मुश्किल काम था, इसलिए केवल 4 परसेंट लोग इनकम टैक्स रिटर्न भर सके। जबकि साल भर में एक बार भरना था।

अब जीएसटी कानून के तहत हर महीने में इनकम टैक्स रिटर्न की तरह जीएसटी रिटर्न भरना होगा। छोटा धंधा बिजनेस दुकान व्यापार करने वालों के लिए यह काम कराने के लिए साइबर कैफे वालों के पास हर महीने चक्कर मारना पड़ेगा या बीस ₹30000 वाला कम से कम एक कर्मचारी रखना पड़ेगा।

भारत जैसे देश में छोटे व्यापारी दुकानदार चाय-पानी किराना की दुकान करने वाले लोग जीएसटी भरेंगे नहीं। इसलिए वह पुलिस को हफ्ता देना पसंद करेंगे। जीएसटी से भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर बढ़ेगा और पुलिस को रिश्वतखोरी का नया जरिया मिलेगा। पुलिस छोटे व्यापारियों को परेशान करेगी।

जीएसटी से फायदा है विदेशी कंपनियों को। अब वह देश में केवल एक ऑफिस खोल कर पूरे देश में बिजनेस करेंगे। हर प्रदेश में ऑफिस खोलने की झंझट खत्म। राष्ट्र की एकता की बात करना बेमानी है क्योंकि राष्ट्र की एकता के लिए सबसे बड़ा जरूरी है पूरे देश के लिए एक भाषा। जिसकी दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।

जीएसटी से फायदा है केंद्र सरकार को। अब जो लोग टैक्स नहीं देते थे उनको भी टैक्स देना पड़ेगा। इससे टैक्स राजस्व बहुत बढ़ जाएगा। लेकिन जो ट्रेंड दिखाई पड़ रहा है, यह नया टैक्स का पैसा बड़े शहरों के ऐशो-आराम पर खर्च किया जाएगा। और सरकारी कर्मचारियों का वेतन बढ़ाया जाएगा। लेकिन नकली राष्ट्रवाद की नीति के तहत आम जनता को टैक्स का पैसा नहीं दिया जाएगा। गांव के विकास पर यह पैसा खर्च नहीं होगा। इसलिए देश को इसका नुकसान ही नुकसान है। जीएसटी से जो नया टैक्स जनता पर पड़ेगा अगर वोटरशिप कानून बना कर लोगों के बैंक खाते में 5896 रुपया सरकार भेजना शुरू कर दे तो जीएसटी आम जनता के लिए फायदेमंद हो जाएगी। जब तक वोटरशिप का कानून नहीं बनता, तब तक जीएसटी का समर्थन आम जनता नहीं कर सकती। अन्य तमाम जुल्मों की तरह यह भी एक नया जुल्म है।

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हाईकोर्ट के जज को हटाने का पूरा अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास मौजूद है -श्री भरत गांधी

हाईकोर्ट के जज को हटाने का पूरा अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास मौजूद है. इसी प्रकार हाईकोर्ट के जज के पास पूरा यह अधिकार है  कि वह जिले के किसी जज को उसके पद से हटा दे। किसी जज के खिलाफ महाभियोग संसद में तब चलाया जाता है, जब जज के अपराध को न्यायपालिका नजरअंदाज कर देती है और संज्ञान लेने से मना कर देती है। जब न्यायपालिका खुद जिसके अपराध के लिए सजा दे रही है तो महाभियोग का प्रश्न ही कहां उठता है। इसलिए बात गलत है कि जस्टिस करण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संसद के अधिकार छीन लिया।

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चुनावी चंदे की लालच में गरीबों और मध्यवर्ग से नाता तोड़ चुकी है केंद्र सरकार- भरत गांधी

देश के अरबपतियों के फायदे के लिए अगर दो सांसद आवाज़ उठाएं तो केंद्र सरकार कानून बना देती है, लेकिन गरीबों और मध्यवर्ग को आर्थिक गुलामी की कुप्रथा से आजादी देने के लिए जब सैकड़ों सांसदों ने वोटरशिप कानून बनाने की आवाज संसद में उठायी, तो केंद्र सरकार को सांप सूंघ गया। वर्तमान मोदी सरकार इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाले बैठी है।

अगर वोटरशिप के नाम का यह कानून बन जाता तो देश में प्रकृति द्वारा दिए गए उत्पादन और उससे छप रही नोट देश के वोटरों में बंट जाती, मशीनों के परिश्रम से जो उत्पादन हो रहा है और उस उत्पादन के बदले जो नोट छप रही है, वह नोट भी देश के वोटरों में बैठ जाती है।

अगर वोटरशिप कानून बन जाता तो देश के वोटरों को संसद और सरकार जैसी उनके द्वारा बनाई गई साझी संपत्ति, कानूनों और संस्थाओं का किराया कम से कम ₹4500 हर महीना मिलने लगता।

लेकिन संसद की एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिश के बावजूद भी वोटरों को विकास में भागीदारी देने वाला वोटरशिप कानून का प्रस्ताव पिछले 12 साल से संसद में लटका है। मोदी सरकार ने इसको ठंडे बस्ते में डाल रखा है, जबकि संसद में इस प्रस्ताव रखने वाले कई लोगों को श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपनी कैबिनेट में मंत्री बना रखा है। क्योंकि वोटरों की शाझी संपत्ति का जो लोग इस्तेमाल कर रहे हैं और उसका किराया डकार रहे हैं, ऐसे अरबपतियों के मुट्ठी में खेल रही है मोदी सरकार।

श्री भरत गांधी असम के शिरांग जिले में आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। श्री भरत गांधी ने कहा कि यह देश केवल अरबपतियों का नहीं है अगर वोटरशिप कानून नहीं बनाया जाता तो यही बात प्रमाणित होगी कि केंद्र सरकार केवल 2 प्रतिशत संपन्न लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, बाकी 98 प्रतिशत गरीब और मध्य वर्ग के लोग बेसरकार हैं, बे संसद हैं, बेवतन हैं, अनाथ हैं और उसी तरह गुलाम हैं, जैसे किसानों के बैल किसानों के गुलाम होते हैं।

जाने माने राजनीति सुधारक ने वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे किसानों के घरों में काम कराने के लिए बैल पाल कर रखे जाते हैं, उसी तरह देश के गरीब और मध्य वर्ग को केवल बैलों की तरह काम कराने के लिए पाल कर रखा गया है, यही आर्थिक गुलामी है।

श्री भरत गांधी ने कहा कि गरीबी और गुलामी में क्या फर्क है यह बताने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री अभी नहीं जानते कि गरीबी और गुलाबी में क्या अंतर है? दर्जनों के पुस्तकों के लेखक श्री भरत गांधी ने कहा कि देश में गरीबी का इलाज किया जा रहा है जबकि बीमारी गुलामी की है. उन्होंने कहा कि जब तक वोटरशिप कानून बनाकर आर्थिक गुलामी की कुप्रथा को बंद नहीं किया जाता, तब तक गरीबी नहीं जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने से गरीबी नहीं जाती। विकास स्तर बढ़ने से गरीबी नहीं जाती।

श्री भरत गांधी ने कहा की वोटरशिप के प्रस्ताव के साथ जो बर्ताव केंद्र सरकारें करती रही हैं, उसे देख कर यह आवाज उठाई जा रही है के अमीरों और गरीबों के हितों में उतना ही टकराव है जितना भारत-पाकिस्तान के हितों में। जब भारत पाकिस्तान की अलग अलग सरकार, अलग-अलग करेंसी नोट, अलग-अलग राष्ट्रीयताओं को मानयता दे हदिया गया, तो अमीरों गरीबों के लिये भी अलग-अलग सरकार और अलग-अलग करेंसी नोट बनना ही चाहिए। क्योंकि 150 किलो का पहलवान 40 किलो के पहलवान से नहीं लड़ सकता। अगर लड़ाई आ जाएगा तो यह प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध होगा। यही अन्याय इस समय संसार भर में चल रहा है। राजनीतिक विचारक ने कहा कि यह जरूरी है कि गरीबों और मध्यवर्ग की राष्ट्रीयता को मान्यता देकर राजनीतिक सुधारों के प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या वोटरशिप कानून बनाया जाए। और विकास में एक-एक वोटर को भागीदारी दिया जाए। श्री भरत गांधी ने कहा कि अगर यह कानून बन जाए तो आज की बाज़ार दरों पर प्रत्येक वोटर को (जो सरकारी कर्मचारी नहीं है और इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आता) 4500 हजार रुपया कम से कम हर महीने मिल सकता है. इससे गरीबी चली जाएगी। बेरोजगारी चली जाएगी, विषमता चली जाएगी, क्रय शक्ति बढ़ने से रोजगार बढ़ेगा।

श्री भरत गांधी ने कहा कि यूरोपियन अंधविश्वासों पर अगर देश को हांका जाएगा तो यह देश के लिए और लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं होगा। संसद में प्रस्तुत वोटरशिप अधिकार संबंधी याचिका के प्रमुख याचिकाकर्ता श्री गांधी ने कहा की केंद्र सरकार ने उनके प्रस्ताव की नकल करके आधार कार्ड का कानून बनाया, कैश ट्रांसफर के नीति बनाई, सब्सिडी का पैसा लोगों के खाते में भेजना शुरू किया, जनधन के नाम से लोगों के बैंक में खाते खुलवाया, बेसिक इनकम के नाम से 1500 रू. हर आदमी को देने का प्रस्ताव किया। किंतु न तो जनधन खातों में पैसा भेजा और ना तो बेसिक इनकम के बारे में अपना वादा पूरा किया। श्री भरत गांधी ने कहा कि गरीबों और मध्य वर्ग से ऐसी बेरुखी लोकतंत्र विरोधी और राष्ट्र विरोधी है। श्री गांधी ने कहा कि अगर मोदी सरकार उत्तर प्रदेश का चुनाव हार जाती तो बेसिक इनकम की दिशा में कदम आगे बढ़ाती किंतु जुल्म करने पर भी वोट मिल रहा है तो सेवा करने की क्या जरुरत है? इस सिद्धांत पर नरेंद्र मोदी जी ने लोगों की आर्थिक दुर्दशा खत्म करने के लिए देश में बेसिक इनकम (Votership का आधा अधूरा रूप ) नाम से उठाये जा रहे कदम से यूटन ले लिया। श्री गांधी असम की विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि इतिहास इन सब चीजों का जवाब पूछेगा और केवल मोदी ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी को इसका जवाब देना होगा।⁠⁠⁠⁠

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Blessings by Sh. Bharat Gandhi to children of Cultural Cell

शिरांग की जनसभा में बोड़ो डांस प्रस्तुत करने वाले वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के बच्चों को आशीर्वाद देते हुए श्री भरत गांधी…।
Blessings by Sh. Bharat Gandhi to children of Cultural Cell , who presented Bodo Dance at the eve of Mass Gathering held in Chirag.

 

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राजनीति सुधारने से पहले चरित्र सुधारना जरूरी – भरत गांधी

पक्षपाती व्यक्ति हमेशा राजनीति को गंदी करेगा, सुधार नहीं सकता। यदि राजनीतिक व्यक्ति अपने परिवार के प्रति पक्षपाती होगा तो बेईमान जरूर निकलेगा। यदि वह अपने गांव या अपने क्षेत्र या अपने जाति या अपने धर्म के प्रति पक्षपाती होगा तो वह भ्रष्ट जरूर निकलेगा। क्योंकि वह दूसरे गांवों, दूसरे क्षेत्रों, दूसरी जातियों और दूसरे धर्मों के धन संपदा को और उसके हिस्से को हड़प कर अपने क्षेत्र में लाना चाहेगा। दूसरे के संस्कारों को तहस-नहस करेगा और अपने संस्कारों की वकालत करेगा। दूसरे क्षेत्रों दूसरे जातियों और दूसरे धर्म के लोगों का हिस्सा हड़पने के लिए उसे जितने भी अपराध करने हों, सभी अपराधों को वह जायज मानेगा।

इसी प्रकार जो व्यक्ति अपने देश के प्रति पक्षपाती होगा, वह दूसरे देशों के धन संपदा को छल बल से अपराध और भ्रष्टाचार से अपने देश में लाना चाहेगा। ऐसे अपराधियों के हाथों में राजनीति रहेगी तो भ्रष्टाचार व अपराध रोक पाना निश्चित रुप से असंभव है। इसलिए जो लोग राजनीतिक क्षेत्र में जाएं, यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि वह पक्षपाती ना हों।

राजनीति सुधारकों की जो ट्रेनिंग देशभर में चलाई जा रही है उससे निष्पक्ष और समदर्शी राजनीति कर्मियों को पैदा किया जा रहा है। उन्होंने आम जनता को भी प्रशिक्षित करने की जरूरत बताया। जो लोग यह समझते हैं कि उनका नेता बेईमानी करके और भ्रष्टाचार करके दूसरे देशों का हिस्सा हड़प के अपने देश में लाए, दूसरे प्रदेशों का हिस्सा हड़प कर अपने प्रदेश में लाए, दूसरे लोकसभा क्षेत्र का पैसा हड़प कर अपने लोकसभा में लाए, दूसरी विधानसभा का हिस्सा हड़पकर अपनी विधानसभा में लाए, दूसरे गांव का हिस्सा हड़प कर अपने गांव में लाए…… ऐसे बेईमान और भ्रष्ट लोगों को यदि नेता बनाया जाएगा, उनको वोट दिया जाएगा तो वह दूसरे क्षेत्रों का हिस्सा हड़पकर अपने क्षेत्र में लाएं या ना लाएं, लेकिन दूसरों का है पैसा और सरकार का पैसा हड़प कर अपने घर में जरुर लाएंगे।

अपनों के प्रति पक्षपाती व्यक्ति समाज सेवा करने में भले नाकाम रहे लेकिन अपनी परिवार सेवा जरूर करेगा। ऐसी परिवार सेवकों का राजनीति में वर्चस्व कायम हो गया है। इसमें नियम-कानून दोषी तो हैं ही, आम जनता की मानसिकता भी कम दोषी नहीं है।

श्री भरत गांधी ने असम में चल रही राजनीति सुधारकों की ट्रेनिंग में पहले दिन लोगों को संबोधित करते हुए बताया कि आज नेताओं के ही नहीं, आम जनता के चरित्र की में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा की अंतर्जातीय, अंतरधार्मिक, और अंतर्राष्ट्रीय शादियां समदर्शी समाज और समदर्शी नेताओं को पैदा करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की शादियों से पैदा होने वाले बच्चे भी अपेक्षाकृत अधिक कुशल और बुद्धिमान होते हैं। यह बात यूजेनिक्स और जेनेटिक्स के शोध से प्रमाणित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सीमा से ज्यादा अमीर लोग अपने पैसे को धार्मिक हिंसा भड़काने में खर्च कर रहे हैं। आने वाले समय में धार्मिक उन्माद और धार्मिक हिंसा से पैदा होने वाले विश्वव्यापी खून खूनखराबे के प्रति लोगों को आगाह करते हुए कहा कि सभी धर्मों के लोग अपने बच्चों के नाम इस तरह रखें जिससे यह न पता चले कि वह बच्चा किस धर्म का है, इसलिए उन्होंने कहा बच्चों का नाम रखने के लिए धार्मिक पुस्तकों को देखने के बजाए विज्ञान गणित और भूगोल के पुस्तकों को देखा जाए। इससे बच्चों के नाम का अनुवाद हो सकेगा और दुनिया के किसी भी कोने में धार्मिक हिंसा से वह सुरक्षित रहेंगे। नाम का अनुवाद हो जाने के नाते वह अपने शैक्षिक जीवन में अधिक सफल हो सकेंगे क्योंकि उनको प्रशिक्षित करने वाले शिक्षकगण अनुवाद योग्य नाम होने के नाते उनके नाम का अर्थ अपनी भाषा में समझ सकेंगे। राजनीति सुधारकों की ट्रेनिंग असम के दरंग जिले के खारुपेटिया टाउन में चल रही है। आज ट्रेनिंग का दूसरा दिन है। ट्रेनिंग का आयोजन आर्ट ऑफ सक्सेस के साथ मिलकर की आसान प्रदेश कमेटी ने किया है।

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भारत-पाकिस्तान की साझी अदालत बने तत्काल – भरत गांधी

कुलभूषण जाधव जैसे लोगों को न्याय मिले इसके लिए जरूरी है कि भारत पाकिस्तान की एक साझी अदालत बनाई जाए, जिसमें दोनों ही देशों के जज रहें। पाकिस्तान के किसी नागरिक के बारे में भारत की अदालत फैसला देगी तो निश्चित रूप से वह फैसला पूर्वाग्रह से ग्रस्त होगा। ठीक इसके विपरीत भारत के किसी नागरिक के बारे में पाकिस्तान की अदालत न्याय देगी, तो वह फैसला पूर्वाग्रह से ग्रस्त होगा ही। इसलिये यह जरूरी है कि न्याय भी हो और न्याय दिखाई भी पड़े। इसके लिए जरूरी है कि केवल भारत ही नहीं बल्कि भारत के सभी पड़ोसी देशों की एक साझी अदालत बनाई जाए और इसके लिए तत्काल प्रभाव से एक अंतर्राष्ट्रीय संधि की जाए।

असम में चल रही है राजनीति सुधारकों की ट्रेनिंग को संबोधित करते हुए श्री भरत गांधी ने कहा की संधि का मसौदा उन्होंने सभी देशों के विदेश मंत्रियों को विचार करने के लिए 15 सितंबर 2015 को ही भेज रखा है, भारत सरकार उसी संधि की पैरवी करें तो काम बन जाएगा। आर्ट ऑफ सक्सेस और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल की असम कमेटी द्वारा संयुक्त रुप से आयोजित राजनीति सुधारकों की ट्रेनिंग को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और उसके पड़ोसी देशों का एक साझा वतन बनाया जाए, इस वतन की केवल अदालत ही नही, अपितु इस अदालत को काम करने के लिए कानून भी बनाए जाएं। इन कानूनों को बनाने के लिए दक्षिण एशियाई वतन की शाझी संसद और सरकार भी बनाया जाए। श्री गांधी ने कहा कि योग के 27 देश मिलकर ऐसा कर चुके है।

राज्य व्यवस्था में सुधार के मुद्दे पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक श्री भरत गांधी ने कहा कि टेलीविजन चैनलों की जो नई भूमिका पैदा हो गई है उसको देखते हुए अब इस काम को टाला नहीं जा सकता। श्री भरत गांधी ने कहा कि टेलीविजन चैनलों के मालिक पैसा कमाने के लिए देश की जनता में इतना ज्यादा गुस्सा भर दें रहे हैं कि ना चाहते हुए भी पड़ोसी देशों में युद्ध हो जाएगा और इस युद्ध में टेलीविजन चैनलों के मालिक नहीं मारे जाएंगे बल्कि भारत और पाकिस्तान के गरीब बच्चे मारे जाएंगे जो दोनों देशों की सेनाओं में काम कर रहे हैं।

श्री भरत गांधी ने राजनीतिक सुधारको के प्रशिक्षण शिविर में दूसरे दिन बोलते हुए कहा कि भारत-पाकिस्तान की शाझी अदालत, साझी संसद और साझी सरकार बन जाने के बाद सुरक्षा पर किया जा रहा बहुत सारा वह खर्च बच जाएगा जो आज अमेरिका को रक्षा सौदों की खरीद में भेजना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह बची हुई रकम दोनों देश अपने अपने देश की जनता के समृद्धि पर खर्च कर सकते हैं इससे दोनों ही देशों की विकास दर बढ़ जाएगी और भविष्य में एक नहीं, सभी कुलभूषण जाधवों को न्याय मिल सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार श्री भरत गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय कुलभूषण जाधव जैसे लोगों को न्याय नहीं दिला सकता क्योंकि फांसी दिया जाए या न दिया जाए यह फैसला अंत में सुरक्षा परिषद करेगी। जिसमें चीन सहित केवल 5 देशों के मुखिया हैं। एक भी देश का मुखिया अगर कुलभूषण जाधव को फांसी पर लटकाने के पक्ष में चला गया तो कुलभूषण जाधव को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय फांसी से बचा नहीं सकता। जब भारत चीन को अपना दुश्मन मानता रहा है, तो दुश्मन से न्याय की उम्मीद भारत को क्यों करनी चाहिए? श्री गांधी ने कहा कि यह सही वक्त है यह आदमी सही नहीं दुनिया के स्तर पर भी कानून का राज कायम किया जाए इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय संधि किया जाए उन्होंने कहा कि इस संधि का यह मसौदा उनकी टीम ने पूरी तरह तैयार करके रखा हुआ है और दुनिया के 198 देशों के सरकारों को विचार करने के लिए उनके समक्ष प्रस्तुत किया है।

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Investigating the bunch of crimes committed by criminal elements of Samajwadi Party

The news of Voters Party International (VPI) is published today in all the national newspapers like Dainik Jagran, Amar Ujala, Hindustan Hindi and Rashtriya Sahara in the whole state of Uttar Pradesh. The media of Uttar Pradesh has opened first time its mouth on the continuous mission of party of combating politics by crime in the country.

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