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पार्टी के संस्थापक भरत गांधी व उनके सहयोगी हैं। श्री भरत गांधी के बारे में जानिये विस्तार से…….

Bharat Gandhi

श्री भरत गांधी एक समकालीन दार्शनिक है, जिनका यह शोध है कि आज की मानव जीवन की ज्यादातर समस्याओं की वजह है आज की राजनीतिक व्यवस्था और कानून। श्री गांधी ने आज की राजनीतिक व्यवस्था का नया ब्लू प्रिंट तैयार करके दुनिया भर के सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष रखा है। उनके प्रस्ताव को भारत के 137 सांसदों ने भारत की संसद में विचार करने के लिए सन 2005 में रखा था। संसद की विशेषज्ञ समिति ने सन् 2011 में इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था, किंतु पार्टियों के अध्यक्षों  ने संयुक्त साजिश करके इसे अब तक रोक रखा है। उन्होंने दर्जनों पुस्तकें लिखी हैं। लोकतंत्र का नया ढांचा तैयार किया है, जिसमें गरीबी, गुलामी, भ्रष्टाचार, असुरक्षा, हिंसा, सांस्कृतिक पतन जैसी तमाम राजनीतिक समस्याओं का का स्थाई रूप से समाधान हो जाएगा। जैसा कि हर दार्शनिक के साथ होता है कि जब तक वह जीवित रहता है, उसकी बातों का उस समय के बुद्धिजीवी विरोध करते हैं और बाद में उसी के रास्ते पर चलते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि श्री गांधी ने राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र, सृष्टि के उद्विकास, आत्मा और ईश्वर जैसे विषयों पर जो नया दर्शन संसार के समक्ष रखा है, वह आने वाले समय में विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगा। किंतु बुद्धिजीवी उनके लंबे-चैड़े साहित्य को इसलिए नहीं पढ़ते कि इस साहित्य को पढ़ने से उन्हें पैसा नहीं मिलेगा और पढ़ने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है और टीवी चैनल श्री भरत गांधी की बातों और कार्यो को इसलिए नहीं दिखाते हैं, श्री भरत गांधी TV चैनल के मालिकों की गलतियों को भी उजागर करते हैं। लेकिन आम जनता कभी भी पूर्वाग्रह से ग्रस्त नहीं होती। लाखों की संख्या में आम जनता श्री भरत गांधी की अनुयाई बन चुकी है। उनको सुनने के लिए कई लाख आदमी जमा होते हैं, लेकिन इस का समाचार कहीं नहीं बनता। क्योंकि उनकी बातें वर्तमान विश्व व्यवस्था की चूलें हिलाने वाली हैं।

अब इतना तो तय हो चुका है कि केवल भारत ही नहीं, दुनिया के हर देश के लोग आने वाले समय में लगभग उसी रास्ते को पसंद करेंगे, जिस रास्ते को श्री भरत गांधी ने अपनी पुस्तक ‘जनोपनिषद’ और ‘लोकतंत्र की पुनर्खोज’ में सुझाया है। श्री भरत गांधी के विषय में जानेमाने विद्वान और लगभग 150 पुस्तकों के लेखक प्रोफेसर रमेश गुप्ता ने एक पुस्तक लिखी है, जिसका नाम है- ‘विश्वसमदर्शी भरत गांधी’। वेबसाइट पर उनके बारे में विस्तार से जानकारी उपलब्ध है।

मुंबई में एक कंपनी के श्रमिक परिवार में पैदा हुए श्री गांधी बचपन से ही बहुत मेधावी थे। उन्होंने एयरफोर्स, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और विधि व्यवसाय का करियर छोड़ा। बाद में अपने पहले ही प्रयास में उत्तर प्रदेश पीसीएस की प्राथमिक परीक्षा क्वालीफाई की। आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण करने की योग्यता रखते हुए भी उन्होंने अपनी 22 साल की उम्र में केवल इसलिए पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि अगर वह आईएएस बनेंगे तो उनके कारण कोई दूसरा बेरोजगार हो जाएगा। इसके बाद उन्होंने शादी विवाह न करने का और व्यक्तिगत परिवार न बनाने का फैसला किया और अपना पूरा जीवन केवल संसार के भलाई के लिए समर्पित कर दिया। आज भारत सहित दुनिया के तमाम देशों ने उनके कई लाख अनुयाई और उनके विचारों के समर्थक हैं, जो रातो-दिन उनके सपनों को धरती पर उतारने के लिए कार्यरत हैं।